Petrol-Diesel Price Down: दुनिया के कई देशों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल है जहां पिछले चार वर्षों में ईंधन की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, मई 2022 से मई 2026 के बीच भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कुल 3.1 फीसदी की कमी आई है।
सरकार का कहना है कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद आम उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए। इनमें उत्पाद शुल्क (Excise Duty) में कटौती और तेल कंपनियों द्वारा कीमतों का बोझ वहन करना शामिल है।
Quick Overview
| Parameter | Details |
|---|---|
| अवधि | मई 2022 से मई 2026 |
| भारत में ईंधन कीमतों में बदलाव | -3.1% |
| पाकिस्तान में बढ़ोतरी | +70% |
| श्रीलंका में बढ़ोतरी | +66% |
| फ्रांस में बढ़ोतरी | +47% |
| इटली में बढ़ोतरी | +46% |
| अमेरिका में बढ़ोतरी | +35% |
| पेट्रोल पर एक्साइज कटौती | ₹3 प्रति लीटर |
| डीजल पर एक्साइज ड्यूटी | शून्य |
Pakistan से America तक बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम
केंद्रीय मंत्री द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, दुनिया के अधिकांश देशों में पिछले चार वर्षों के दौरान ईंधन की कीमतों में भारी बढ़ोतरी देखने को मिली है। पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल के दाम करीब 70 फीसदी तक बढ़ गए हैं, जबकि श्रीलंका में 66 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
यूरोपीय देशों की बात करें तो फ्रांस में ईंधन की कीमतें 47 फीसदी और इटली में 46 फीसदी तक बढ़ी हैं। अमेरिका में भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग 35 फीसदी का इजाफा हुआ है। इसके विपरीत भारत में कीमतों में शुद्ध गिरावट दर्ज की गई है, जिसे सरकार अपनी नीतियों का परिणाम बता रही है।
कैसे आई 3.1% की गिरावट?
सरकार के मुताबिक पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक आपूर्ति संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतें कई बार तेज़ी से बढ़ीं। कुछ समय पहले अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल का भाव 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 122 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था।
ऐसी स्थिति में आम जनता पर अतिरिक्त बोझ न पड़े, इसके लिए केंद्र सरकार ने पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी में 3 रुपये प्रति लीटर की कटौती की। वहीं डीजल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क को शून्य कर दिया गया। इन फैसलों का सीधा फायदा उपभोक्ताओं को मिला और घरेलू बाजार में कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद मिली।
सरकार ने उठाया बड़ा राजस्व बोझ
सरकार का दावा है कि वैश्विक बाजार में तेल की ऊंची कीमतों का असर सीधे उपभोक्ताओं तक न पहुंचे, इसके लिए उसने सालाना एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व त्याग किया है।
उत्पाद शुल्क में कटौती के कारण सरकार को बड़ी आय का नुकसान हुआ, लेकिन इसके बावजूद उपभोक्ताओं को राहत देने का फैसला बरकरार रखा गया। इसके साथ ही सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने भी कई बार अंतरराष्ट्रीय कीमतों और घरेलू बिक्री मूल्य के बीच अंतर का बोझ उठाया।
Oil Companies ने झेली Under-Recovery
सरकारी तेल कंपनियों ने कई अवसरों पर वैश्विक कीमतों में तेजी के बावजूद घरेलू बाजार में कीमतों को नियंत्रित रखा। इससे कंपनियों को भारी Under-Recovery का सामना करना पड़ा।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार और तेल कंपनियां यह बोझ नहीं उठातीं, तो देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें कहीं अधिक हो सकती थीं। इसी वजह से भारत में ईंधन कीमतों में अपेक्षाकृत स्थिरता बनी रही।
हाल के दिनों में क्यों बढ़े दाम?
हालांकि पिछले कुछ सप्ताहों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में फिर से तेजी देखी गई है, जिसके कारण घरेलू बाजार में भी पेट्रोल और डीजल के दामों पर दबाव बना है।
फिर भी लंबी अवधि के आंकड़ों को देखें तो मई 2022 से मई 2026 के बीच कुल मिलाकर कीमतों में 3.1 फीसदी की गिरावट बनी हुई है। सरकार का कहना है कि अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के बावजूद उपभोक्ताओं को राहत देने की नीति जारी रहेगी।
सरकार का नया नियम: 200 लीटर डीजल लिमिट
सरकार ने डीजल की कालाबाजारी और औद्योगिक उपयोग के लिए खुदरा पेट्रोल पंपों से बड़ी मात्रा में खरीद पर रोक लगाने के लिए नया नियम लागू किया है।
इसके तहत किसी भी वाहन को एक दिन में अधिकतम 200 लीटर डीजल ही दिया जाएगा। इस कदम का उद्देश्य आम उपभोक्ताओं के लिए पर्याप्त ईंधन उपलब्धता सुनिश्चित करना और अवैध भंडारण को रोकना है।
सरकार का मानना है कि इससे खुदरा बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी और पेट्रोल पंपों पर डीजल की कृत्रिम कमी जैसी समस्याओं पर नियंत्रण मिलेगा।
Data Analysis
| Country | Fuel Price Change (2022-2026) |
|---|---|
| India | -3.1% |
| Pakistan | +70% |
| Sri Lanka | +66% |
| France | +47% |
| Italy | +46% |
| United States | +35% |
क्या आम जनता को आगे भी मिलेगी राहत?
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में पेट्रोल और डीजल की कीमतें काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के बाजार पर निर्भर करेंगी। यदि वैश्विक तनाव कम होता है और सप्लाई स्थिर रहती है, तो कीमतों में और राहत मिल सकती है।
हालांकि यदि भू-राजनीतिक संकट गहराता है या कच्चे तेल की कीमतें फिर से रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचती हैं, तो घरेलू बाजार पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में सरकार की टैक्स नीति और तेल कंपनियों की मूल्य निर्धारण रणनीति महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
दुनिया के कई देशों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी वृद्धि के बीच भारत में पिछले चार वर्षों में 3.1 फीसदी की गिरावट दर्ज होना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। सरकार द्वारा उत्पाद शुल्क में कटौती, राजस्व बोझ उठाने और तेल कंपनियों के सहयोग से उपभोक्ताओं को राहत देने का प्रयास किया गया है।
आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति पर नजर रखना जरूरी होगा, लेकिन फिलहाल भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां ईंधन की कीमतों को नियंत्रित रखने में अपेक्षाकृत सफलता मिली है।







