सरकार द्वारा गोल्ड पर आयात शुल्क बढ़ाने के बाद देश में सोने के आयात में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। अब हर महीने 75-100 टन के मुकाबले केवल 25-30 टन सोना ही आयात हो रहा है। साथ ही, बैंकों से आयात का अधिकार वापस लेकर सिर्फ तीन एजेंसियों को इसकी अनुमति दी गई है।
Gold Import News: इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने के बाद घटा सोने का आयात
भारत में सोने के आयात पर सरकार की सख्ती का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। हाल ही में गोल्ड पर आयात शुल्क बढ़ाए जाने के बाद देश में सोने का मासिक आयात तेजी से घट गया है। सूत्रों के अनुसार, जहां पहले हर महीने 75 से 100 टन तक सोने का आयात होता था, वहीं अब यह आंकड़ा घटकर केवल 25 से 30 टन प्रति माह रह गया है।
जानकारी के मुताबिक, सरकार का यह कदम विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) पर दबाव कम करने, रुपये को मजबूती देने और बढ़ते व्यापार घाटे को नियंत्रित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
अब बैंकों को नहीं मिला गोल्ड आयात का अधिकार
सूत्रों के अनुसार, 1 अप्रैल 2026 से कस्टम विभाग ने बैंकों को गोल्ड के अधिकृत आयातक (Designated Importer) के रूप में नोटिफाई नहीं किया है। इसके बाद अब देश में केवल तीन एजेंसियों को ही सोना आयात करने की अनुमति दी गई है, जिनमें सरकारी कंपनी MMTC भी शामिल है।
इस बदलाव के बाद गोल्ड इंपोर्ट का पूरा ढांचा पहले की तुलना में काफी सीमित हो गया है।
सरकार ने कितना बढ़ाया गोल्ड पर आयात शुल्क?
हाल ही में केंद्र सरकार ने सोने पर लगने वाले कुल प्रभावी आयात शुल्क को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है।
नई व्यवस्था के तहत:
- बेसिक कस्टम ड्यूटी 5% से बढ़ाकर 10% की गई
- एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस (AIDC) 1% से बढ़ाकर 5% किया गया
- कुल प्रभावी आयात शुल्क 6% से बढ़कर 15% हो गया
सरकार का मानना है कि इससे अनावश्यक गोल्ड इंपोर्ट में कमी आएगी और विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
क्यों लिया गया यह फैसला?
विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं और अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच भारत सरकार ने यह कदम उठाया है।
इस फैसले के पीछे प्रमुख कारण हैं:
- सोने के आयात को नियंत्रित करना
- चालू खाते के घाटे (Current Account Deficit) को कम करना
- विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव घटाना
- रुपये को मजबूती देना
- आयात बिल में कमी लाना
भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना आयातक देशों में शामिल है, इसलिए गोल्ड इंपोर्ट में कमी का असर सीधे देश के व्यापार संतुलन पर पड़ सकता है।
घरेलू बाजार पर क्या होगा असर?
सोने के आयात में आई इस बड़ी गिरावट का असर आने वाले समय में घरेलू बाजार पर दिखाई दे सकता है। यदि देश में सोने की मांग मजबूत बनी रहती है और आयात सीमित रहता है, तो घरेलू बाजार में सोने की कीमतें अंतरराष्ट्रीय कीमतों की तुलना में अधिक रह सकती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि मांग और आपूर्ति के बीच अंतर बढ़ने पर गोल्ड प्रीमियम भी बढ़ सकता है, जिससे निवेशकों और ज्वेलरी खरीदारों दोनों पर असर पड़ सकता है।
सरकार को मिल सकती है बड़ी राहत
सोने का आयात भारत के कुल आयात बिल का एक बड़ा हिस्सा होता है। ऐसे में आयात में कमी आने से सरकार को व्यापार घाटा (Trade Deficit) कम करने में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही विदेशी मुद्रा की बचत होगी और आर्थिक संतुलन बनाए रखने में भी सहायता मिलेगी।
गोल्ड पर आयात शुल्क बढ़ाने के बाद भारत में सोने का आयात तेजी से घटा है। जहां पहले हर महीने 100 टन तक सोना आयात किया जाता था, अब यह घटकर करीब 30 टन रह गया है। साथ ही बैंकों को आयात की अनुमति न देकर केवल तीन एजेंसियों तक इसे सीमित कर दिया गया है। आने वाले समय में इसका असर घरेलू कीमतों, मांग और बाजार की उपलब्धता पर देखने को मिल सकता है।

